NATO full form in Hindi (North Atlantic Treaty Organization)

नमस्कार दोस्तों, हमारा आज का लेख NATO full form in Hindi (North Atlantic Treaty Organization) से संबंधित है। अगर आप NATO से संबंधित जानकारी की तलाश कर रहे हैं तो हमारा आज का आर्टिकल आपके लिए बेहद ही कारगर साबित होगा। यहां हम आपको NATO का full form, नाटो’ क्यों और कब बना था, NATO (नाटो) का इतिहास, NATO का उद्देश्य, नाटो के कार्य आदि से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

नाटो का फुल फॉर्म क्या है ?

NATO Full Form in English

N – North

A – Atlantic

T – Treaty

O – Organization

इस तरह NATO का फुल फॉर्म North Atlantic Treaty Organization होता है।

NATO full form in Hindi

NATO full form (North Atlantic Treaty Organization) हिंदी में “उत्तर अटलांटिक संधि संगठन” होता है।

NATO kya hai?

NATO नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी पर आधारित एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है, इसे उत्तर अटलांटिक एलायंस भी कहा जाता है। यह संगठन सामूहिक रक्षा की एक प्रणाली का गठन करता है, जिसके तहत इस संधि पर हस्ताक्षर करने वाले किसी भी सदस्य राष्ट्र पर किसी बाहरी पार्टी द्वारा किए गए हमले के जवाब में उसके सभी सहयोगियों पर हमले के रूप में देखा जाएगा और सभी सहयोगी राष्ट्र आपसी रक्षा के लिए सहमत होते हैं। इसकी स्थापना 4 अप्रैल 1949 को की गई थी। नाटो का मुख्यालय ब्रुसेल्स, बेल्जिय में है।

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NATO (नाटो) का उद्देश्य ?

NATO का सबसे पहला और मुख्य उद्देश्य है अपने सदस्य देशों की स्वतंत्रता की रक्षा और सुरक्षा करना। इसके अत्तिरिक्त हाल के वर्षों में NATO ने हिंसा के बढ़ते संदर्भ के साथ अपने उद्देश्य का विस्तार किया है जिसके अंतर्गत यह यह सदस्य देशों को आतंकवाद, साइबर हमलों और सामूहिक विनाश के हथियारों से भी सुरक्षित और संरक्षित करेगा।

NATO का इतिहास | नाटो की स्थापना क्यों हुई थी ?

पूर्व के सोवियत संघ ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद  पूर्वी यूरोप से अपनी सेनाएँ हटाने से मना कर दिया और अंतर्राष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन करके 1948 में बर्लिन की नाकेबंदी कर दी।

NATO का इतिहास

सोवियत संघ के इस कदम से अमेरिका सहित यूरोप के देशों को लगा कि सोवियत संघ वहाँ साम्यवादी शासन की स्थापना करना चाहता है। इसलिए, अमेरिका ने एक ऐसा संगठन बनाने की पहल की जो कि सोवियत संघ के अतिक्रमण से पश्चिमी देशों की रक्षा कर सके। अतः अमेरिका ने 4 अप्रैल, 1949 को वांशिगटन में नाटो की स्थापना की, जिस पर 12 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। ये देश थे – संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, इटली, नीदरलैंड, आइसलैण्ड, बेल्जियम, लक्जमर्ग, नार्वे, पुर्तगाल और डेनमार्क।

इसके बाद इसमें समय समय पर अन्य देश भी शामिल होते रहे –

  • 1952 में ग्रीस और तुर्की ने संघ में प्रवेश किया।
  • 1955 में पश्चिम जर्मनी शामिल हुआ।
  • 1982 में स्पेन ने प्रवेश किया।
  • 1997 में हंगरी, चेक गणराज्य और साथ ही पोलैंड भी शामिल हुए।
  • 2004 में इसमें सात देशों ने प्रवेश किया – एस्टोनिया, बुल्गारिया, लिथुआनिया, लातविया, रोमानिया, स्लोवेनिया और स्लोवाकिया।
  • 2009 में अल्बानिया और क्रोएशिया इसके सदस्य बने।
  • 2017 में बाल्कन देश मोंटेनेग्रो नाटो का 29 वां सदस्य बन गया।
  • 2019 में मैसेडोनिया नाटो का 30 वां सदस्य देश बन गया।

वर्तमान में इसके 30 सदस्य देश हैं।

नाटो के कार्य ?

  • नाटो का मुख्य कार्य को वर्तमान रणनीतीक अवधारणा (2010) के अंतर्गत निर्धारित किया गया है जिसमें सामूहिक सुरक्षा, संकट प्रबंधन और सहकारी सुरक्षा शामिल है।
  • नाटो आतंकवाद की समस्या से निपटने के साथ-साथ आतंकवादी हमले के परिणामों का प्रबंधन करने के लिये नई क्षमताओं और प्रौद्योगिकियों का विकास करता है।
  • नाटो लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने और अपने सदस्यों देशों की समस्याओं को हल करने के अलावा न केवल विश्वास का निर्माण करता है बल्कि रक्षा और सुरक्षा मामलों पर परामर्श और सहयोग की अनुमति भी देता है।
  • नाटो शांतिपूर्ण तरीके से विवादों को हल करने के लिये राजनयिक प्रयास करता है यदि ये प्रयास विफल होता है तो उसे इस प्रकार के संकट प्रबंधन कार्यों को करने के लिये सैन्य शक्ति का भी प्रयोग करता है।
  • नाटो नि:शस्रीकरण, हथियारों के नियंत्रण और इसके अप्रसार के लिये वचनबद्ध है। इस प्रकार ये गठबंधन के सुरक्षा उद्देश्यों की उपलब्धि के साथ-साथ रणनीतिक स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा के लिये भी एक आवश्यक योगदान देता है।

नाटो की संरचना ?

नाटो (NATO) की संरचना चार अंगों से मिलकर बनी है –

परिषद

यह नाटो का सबसे प्रमुख अंग है। परिषद का निर्माण राज्य के मंत्रियों से होता है। इसकी मंत्रिस्तरीय बैठक वर्ष में एक बार होती है। इसका मुख्य उत्तरदायित्व समझौते की धाराओं को लागू करना है।

उप परिषद

उप परिषद नाटो के सदस्य देशों द्वारा नियुक्त कूटनीतिक प्रतिनिधियों की परिषद है। ये नाटो संगठन से संबन्धित सामान्य हितों वाले विषयों पर विचार करते हैं।

प्रतिरक्षा समिति

नाटो के सदस्य देशों के प्रतिरक्षा मंत्री प्रतिरक्षा समिति में शामिल होते हैं। इसका मुख्य कार्य प्रतिरक्षा रणनीति तथा नाटो एवं गैर नाटो देशों में सैन्य सम्बन्धी विषयों पर विचार विमर्श करना।

सैनिक समिति

सैनिक समिति का मुख्य कार्य नाटो परिषद एवं उसकी प्रतिरक्षा समिति को सलाह देना है। इसमें देशों के सेनाध्यक्ष भी सम्मिलित होते हैं।

नाटो से अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | NATO FAQs

नाटो मूल रूप से क्या है ?

NATO नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी पर आधारित एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है, इसे उत्तर अटलांटिक एलायंस भी कहा जाता है।

नाटो में कौन-कौन से देश हैं ?

वर्तमान में नाटो में 30 सदस्य देश हैं –
संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, इटली, नीदरलैंड, आइसलैण्ड, बेल्जियम, लक्जमर्ग, नार्वे, पुर्तगाल, डेनमार्क, ग्रीस, तुर्की, पश्चिम जर्मनी, स्पेन, हंगरी, चेक गणराज्य, पोलैंड, एस्टोनिया, बुल्गारिया, लिथुआनिया, लातविया, रोमानिया, स्लोवेनिया, स्लोवाकिया, अल्बानिया, क्रोएशिया, बाल्कन देश मोंटेनेग्रो, मैसेडोनिया।

नाटो संगठन किस सिद्धांत पर काम करता है ?

नाटो सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर काम करता है, जिसका तात्पर्य  है ‘एक या अधिक सदस्यों पर आक्रमण सभी सदस्य देशों पर आक्रमण माना जाता है।

नाटो का पूरा नाम क्या है ?

नाटो का पूरा नाम उत्तर अटलांटिक संधि संगठन है।

नाटो का मुख्यालय कहां है ?

नाटो का मुख्यालय ब्रुसेल्स, बेल्जिय में है।

नाटो का सबसे प्रमुख अंग कौन सा है ?

परिषद नाटो का सबसे प्रमुख व सर्वोच्च अंग है। इसका निर्माण राज्य के मंत्रियों से होता है। इसकी मंत्रिस्तरीय बैठक वर्ष में एक बार होती है। परिषद का मुख्य उत्तरदायित्व समझौते की धाराओं को लागू करना होता है।

आज आपने क्या सीखा?

दोस्तों, आज के आर्टिकल में हमने आपको NATO full form in Hindi (North Atlantic Treaty Organization) के बारे में सम्पूर्ण ज्ञान दिया है। जिसमें हमने NATO का full form, नाटो’ क्यों और कब बना था, NATO (नाटो) का इतिहास, NATO का उद्देश्य, नाटो के कार्य आदि के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी है।

यदि अभी भी आपके मन में NATO full form in Hindi (North Atlantic Treaty Organization) से संबंधित कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमें कमेंट में बता सकते हैं। हम आपके समस्याओं का समाधान करने की पुरी कोशिश करेंगे। धन्यवाद

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